बिहार राजनीति : यादव क्यों बनाए जा रहे विलेन?

“ज्ञान बिंदु डायरेक्टर रौशन आनंद सर के छोटे भाई प्रिंस यादव की हत्या हो गई। पहले बड़े भाई को जेल भेजा गया अब छोटे भाई की हत्या हो गई। सब याद रखा जाएगा सम्राट कुशवाहा! बिहार का एक एक बच्चा तुम्हें और तुम्हारे करतूत का नोट्स बना रहे हैं, कैसे तुमने शुरू दिन से एक खास जाति विशेष के खिलाफ जहरीले शब्द बोले हैं, कैसे तुमने एक जाति विशेष को शुरू दिन से अपराधी बताया!” राजद पार्टी से जुड़े प्रिंस यादव बताते है।

गौरतलब है कि हाल फिलहाल में बिहार पुलिस के द्वारा हुआ एनकाउंटर में रामधनी यादव, सोनु यादव मारे गए, वहीं मिंटू यादव, दिलीप राय और पप्पू राय जैसे आरोपी मुठभेड़ में घायल हुए।

हाल ही में बिहार में हुई पुलिस मुठभेड़ों में राज्य की कानून‑व्यवस्था को चुनौती देने वाले कुछ कथित कुख्यात अपराधी मारे गए हैं। इनमें से अधिकांश यादव समुदाय के है। इसको लेकर बिहार की राजनीति फिर से जातिगत राजनीति की तरफ मोड़ ले लिया है। मीडिया एवं सोशल मीडिया पर कई राजद नेता राज्य में हो रही पुलिस कार्रवाई और मुठभेड़ों पर सवाल उठाते हुए पुलिस पर जाति विशेष (यादव) को देखकर एनकाउंटर करने” का आरोप लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एआई समिट में कहा कि पटना में करीब चार हज़ार कैमरे लगे हैं और अगर एआई से कहा जाए कि “हरे गमछे वाले” को ढूँढो तो वह तुरंत पहचान लेगा। संभवत उनका इशारा किसी जाति की ओर नहीं था, लेकिन राजद कार्यकर्ता अक्सर कंधे पर हरा गमछा रखते हैं और यादव समुदाय को राजद का मुख्य कार्यकर्ता माना जाता रहा है। इसलिए कई लोग इसे यादव जाति की तरफ संकेत मान रहे हैं। इसके बाद यह मुद्दा और प्रभावी हो गया है।

एनडीए के कुछ नेताओं ने पिछले दिनों इशारों-इशारों में यादवों को अपराध से जोड़ने की कोशिश की। जानकार इसे जातिगत ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहे है। बिहार में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि क्यों बिहार की जेलों में 40 फीसदी कैदी एक ही जाति के हैं? बिहार की एक जाति ऐसी है, जो अपराध, जमीन कब्जे और दलित उत्पीड़न के मामलों में शामिल रही है।

वहीं बिहार में सत्ताधारी जदयू के विधायक अजय कुशवाहा बिहार में हो रहे एनकाउंटर पर कहते हैं कि “जब कानून‑व्यवस्था खराब होती है, तो वे (राजद) कहते हैं कि सब ठीक नहीं है। जब कानून ठीक करने के लिए कार्रवाई की जाती है, तो वही लोग शिकायत करते हैं कि जाति देखकर छोड़ा या मारा गया। उनके इलाके में अपराध अधिक हैं — लगभग 50 प्रतिशत। इसलिए स्वाभाविक है कि उनके समुदाय (यादव) के ज़्यादा लोग कार्रवाई में शामिल होंगे और उन्हें नुकसान होगा। इसलिए वे शोर मचाएंगे और दुख जताएंगे।”

पिछड़ी जातियों में डॉमिनेट जाति को टारगेट करना नया नहीं 

वरिष्ठ पत्रकार राजेश ठाकुर बताते हैं कि,”यह भाजपा का मास्टर स्ट्रोक हो सकता है, 2027 के यूपी इलेक्शन के लिए। अगर इस मुद्दे को ज्यादा हवा दी गई तो यूपी में इसका लाभ मिलेगा। यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है। भाजपा यह कोई नया राजनीतिक प्रयोग नहीं कर रही है। पिछले कई वर्षों से पिछड़ी जातियों में डॉमिनेट जाति को टारगेट करके चुनावी बिसात बिछाने में भाजपा माहिर खिलाड़ी की भूमिका में हैं। आप हरियाणा को ही देख लीजिए, वहां जाट जाति के खिलाफ अन्य ओबीसी जातियों को खड़ा करने में भाजपा सफल रही है।” 

राजद से जुड़े प्रिंस बताते हैं कि,”अभी बिहार में यादवों को साफ करने का ट्रेंड चल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री बोल रहे हैं कि जाति देख कर के एनकाउंटर करो और हरा गमछा वालो को ढूंढो, तो कोई बोल रहा है कि यादवों बिहार छोड़ दो। तो कोई बोल रहा है कि बिहार में 50% अपराधी यादव जाति से है।‌ यह सब बयान इसलिए दिया जा रहा है कि यादव कोई ऐसा वैसा कुछ लिखें या बोले ताकि उसको जेल में डाल दिया जाए, या अपराधी बता कर एनकाउंटर कर दिया जाए।” 

तेजस्वी यादव बिहार में लॉ एंड ऑर्डर पर कहते हैं, “यह सरकार बिहारवासियों को बेवकूफ बना रही है। जाति विशेष के खिलाफ पुलिसिया अत्याचार को प्रोत्साहित कर यह अनैतिक सरकार, जनता का ध्यान भटका कर चंद नकारात्मक प्रवृत्ति के लोगों को मानसिक संतुष्टि और खुशी तो दे सकती है लेकिन महिलाओं पर अत्याचार नहीं रोक सकती। वैसे भी मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के संरक्षक इस सरकार के मार्गदर्शक है तो आप इनसे क्या ही उम्मीद रखेंगे।”

जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार बताते हैं कि,”यह धारणा बिल्कुल गलत है। 20 नवंबर, 2025 के बाद छह अपराधी मारे गए। एक ब्राह्मण, एक भूमिहार, एक कुशवाहा, एक मालाकार भी थे। हां, दो यादव भी थे। अपराधियों की कोई जाति नहीं होती। जो पुलिस पर गोली चलाएंगे, वे मारे जाएंगे”

यादवों की छवि खराब करने से एनडीए को दो फायदे हो सकते हैं। पहला, यादवों को ओबीसी राजनीति से अलग कर दिया जाए और बिहार में गैर‑यादव ओबीसी को ही मजबूत किया जाए और दूसरा अपराध की बढ़ती चर्चा को हटाकर बात दूसरी तरफ मोड़ दी जाए और अपराध की जिम्मेदारी राजद पर डाली जाए।

हालांकि भाजपा ने कई बार कोशिश की कि यादव समुदाय के वोट उसे मिलें। इसके लिए उसने नंद किशोर यादव और नित्यानंद राय जैसे यादव नेताओं को जिम्मेदारी दी, रामकृपाल यादव जैसे राजद के बड़े नेता को पार्टी में शामिल कर बढ़ावा दिया, और भूपेंद्र यादव को बिहार का प्रभारी बनाया। फिर भी राजद के समर्थन वाले यादवों को बीजेपी के पक्ष में लाने में सफलता नहीं मिली। राजद नेता के मुताबिक जब यादवों को अपनी तरफ नहीं ला पाएं तो इस तरह का षड्यंत्र कर रहे हैं।

(राहुल गौरव रिपोर्टर हैं।)

Leave a Reply